Best 400+ Gulzar Shayari in Hindi | गुलज़ार शायरी 2026
गुलज़ार शायरी हिंदी साहित्य की वह अनमोल धरोहर है, जो अपनी सादगी, गहराई और भावनाओं की सच्चाई के लिए जानी जाती है। गुलज़ार साहब की शायरी में प्यार, दर्द, खामोशी, रिश्तों की नज़ाकत और ज़िंदगी के छोटे-छोटे एहसास बेहद खूबसूरती से उभरकर सामने आते हैं।
अगर आप Gulzar Shayari, गुलज़ार की मशहूर शायरी, या दिल को छू लेने वाली गुलज़ार शायरी की तलाश में हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए एक बेहतरीन कलेक्शन लेकर आई है। यहाँ आपको रोमांटिक, सैड, और लाइफ से जुड़ी गुलज़ार शायरी का ऐसा संगम मिलेगा, जिसे आप आसानी से अपने दोस्तों, परिवार या सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं।
Gulzar Shayari

तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ
तेरी चाहत में अक्सर, संभलना भूल जाता हूँ !!
हम अपनों से परखे गए हैं कुछ गैरों की तरह
हर कोई बदलता ही गया हमें शहरों की तरह !!
यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता !!
सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं !!
कर जा कुछ ऐसा के जीने का अफसोस बाक़ी ना रह जाए
कर दिल की हर हसरत पूरी कोई अरमान बाक़ी ना रह जाए !!
Heart Touching Gulzar Shayari

वो जो उठातें हैं क़िरदार पर उंगलियां
तोहफे में उनको आप आईने दीजिए !!
मुद्दतें लगी बुनने में ख्वाब का स्वेटर
तैयार हुआ तो मौसम बदल चूका था !!
खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है !!
मंजर भी बेनूर था और फिजायें भी बेरंग थीं
बस फिर तुम याद आये और मौसम सुहाना हो गया !!
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते !!
Gulzar Shayari on Love

तुम लौट कर आने की तकलीफ़ मत करना
हम एक ही मोहब्बत दो बार नहीं किया करते !!
सब तरह की दीवानगी से वाकिफ हुए हम
पर मा जैसा चाहने वाला जमाने भर में ना था !!
महफ़िल में गले मिलकर वह धीरे से कह गए
यह दुनिया की रस्म है, इसे मुहोब्बत मत समझ लेना !!
समेट लो इन नाजुक पलों को ना जाने ये लम्हें हो ना हो
हो भी ये लम्हें क्या मालूम शामिल उन पलो में हम हो ना हो !!
दिल अब पहले सा मासूम नहीं रहा
पत्त्थर तो नहीं बना पर अब मोम भी नहीं रहा !!
Gulzar Shayari in Hindi

खता उनकी भी नहीं यारो वो भी क्या करते
बहुत चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करते !!
जागना भी कबूल है तेरी यादों में रातभर
तेरे अहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ !!
तजुर्बा कहता है रिश्तों में फ़ासला रखिए
ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है !!
काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी !!
बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद को इस ज़मीन से
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है !!
2 Lines Gulzar Shayari

तुमको ग़म के जज़्बातों से उभरेगा कौन
ग़र हम भी मुक़र गए तो तुम्हें संभालेगा कौन !!
आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ !!
उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले !!
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं !!
आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई !!
Deep Meaning 2 Lines Gulzar Shayari

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता !!
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है !!
तन्हाई अच्छी लगती है सवाल तो बहुत करती
पर जवाब के लिए ज़िद नहीं करती !!
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई !!
वफा की उम्मीद ना करो उन लोगों से
जो मिलते हैं किसी और से होते है किसी और के !!
One Line Gulzar Shayari

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा !!
हम तो अब याद भी नहीं करते
आप को हिचकी लग गई कैसे?
बहुत अंदर तक जला देती हैं
वो शिकायते जो बया नहीं होती !!
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया?
आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है !!
Gulzar Shayari on Life

कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता !!
सहर न आई कई बार नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले !!
बदल जाओ वक़्त के साथ या वक़्त बदलना सीखो
मजबूरियों को मतं कोसो, हर हाल में चलना सीखो !!
हसरत थी दिल में की एक खूबसूरत महबूब मिले
मिले तो महबूब मगर क्या खूब मिले !!
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँखों में हमको भी तो इंतजार दिखे !!
Life Gulzar Shayari

एक सुकून की तलाश में जाने कितनी बेचैनियां पाल लीं
और लोग कहते हैं कि हम बड़े हो गए हमने ज़िंदगी संभाल ली !!
कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना !!
पूरे की ख्वाहिश में ये इंसान बहुत कुछ खोता है
भूल जाता है कि आधा चांद भी खूबसूरत होता है !!
आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद !!
कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद !!
Gulzar Shayari on Gulab

मैंने गुलाब से पूछा इश्क़ का मतलब
वो मुस्कुरा कर कांटों की तरफ इशारा कर गया !!
गुलाब रखा था किताब में तुम्हारे नाम का
आज भी उसकी खुशबू में तुम मिल जाते हो !!
एक गुलाब सा रिश्ता था हमारा
हल्की सी चोट लगी, और बिखर गया !!
हर रोज़ एक गुलाब देता हूँ तेरी याद को
शायद किसी दिन वो भी महक उठे !!
गुलाब की तरह तुम भी नाज़ुक थे
छूने की चाह में ही घायल हो गए !!
Khamoshi Gulzar Shayari

तेरी खामोशी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया
अब लफ्ज़ों से ज्यादा सुकून चुप रहने में पया !!
खामोशी भी अजीब सी ज़ुबान होती है
कह देती है वो बातें जो लफ्ज़ नहीं कह पाते !!
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की !!
तुम चुप थे, मगर सब कह गए
मैं सुनता रहा, बिना कुछ सुने !!
कुछ रिश्ते खामोशी में ही पनपते हैं
बिना आवाज़ के भी बहुत कुछ कह जाते हैं !!
Gulzar Shayari on Eyes

कुछ ख्वाब आँखों में ही रह जाते हैं
हकीकत बनने से पहले ही टूट जाते हैं !!
आँखों से गिरते आँसू भी अजीब होते हैं
दर्द दिल में होता है, और बहते आँखों से हैं !!
तेरी आँखों में जो सुकून मिला
वो कहीं और तलाशने से भी नहीं मिला !!
आँखें तेरी कुछ यूँ बात करती हैं
बिना लफ्ज़ों के भी इज़हार कर जाती हैं !!
तेरी आँखों का असर ऐसा हुआ मुझ पर
अब हर ख्वाब में सिर्फ तू ही नजर आता है !!
Gulzar Shayari on Mother

मेरी हर जीत में उसका हाथ होता है
माँ का आशीर्वाद हमेशा साथ होता है !!
माँ की दुआओं में जो असर होता है
वो किसी दवा में कहाँ होता है !!
थक कर जब लौटता हूँ इस दुनिया से
माँ की गोद में सर रख के सोता हूं सुकून से !!
माँ के बिना ये घर घर नहीं लगता
बस दीवारों का एक मकान लगता !!
माँ की आँखों में जो प्यार दिखता है
वो पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलता !!
